गिरफ्तारी से जुड़े नियम आसान भाषा में पूरी जानकारी

गिरफ्तारी से जुड़े नियम आसान भाषा में पूरी जानकारी
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यह सामग्री मुख्य रूप से स्वयं के अध्ययन, जानकारी को सुरक्षित रखने और आवश्यकता पड़ने पर संदर्भ के लिए लिखी गई है। यदि इससे किसी अन्य व्यक्ति को भी उपयोगी जानकारी मिलती है, तो यह हमारे लिए प्रसन्नता की बात होगी।
गिरफ्तारी के संबंध में बृहद निर्देश
अर्नेश कुमार बनाम बिहार राज्य एवं अन्य, [(2014) 8 SCC 273]
  डी.के. बसु बनाम पश्चिम बंगाल सरकार, [(1997) 1 SCC 416]
Arnesh Kumar मामले में न्यायालय ने कहा कि 7 वर्ष तक के कारावास से दंडनीय अपराधों में गिरफ्तारी नियमित प्रक्रिया नहीं होनी चाहिए। पुलिस को धारा 41A Cr.P.C. (अब धारा 35 BNSS) के तहत नोटिस जारी करना तथा हिरासत की आवश्यकता को उचित ठहराने वाले कारण को दर्ज करना आवश्यक है।
डी.के. बसु बनाम पश्चिम बंगाल सरकार, मामले में हिरासत में संवैधानिक सुरक्षा उपाय निर्धारित किए गए, जिसमे गिरफ्तारी मेमो और अनिवार्य चिकित्सकीय जांच आदि सम्बंधित आदेश दिया गया हैं।
1.गिरफ्तार व्यक्ति को गिरफ्तार करने और उससे पूछताछ करने वाले पुलिस अधिकारी को अपने पदनाम के साथ स्पष्ट, दिखाई देने वाले और स्पष्ट पहचान पत्र और नाम टैग पहनना अनिवार्य है। पूछताछ करने वाले सभी पुलिस कर्मियों का विवरण एक रजिस्टर में दर्ज किया जाना चाहिए।
2) गिरफ्तारी करने वाले पुलिस अधिकारी को गिरफ्तारी के समय गिरफ्तारी का ज्ञापन तैयार करना होगा और इस पर कम से कम एक गवाह के हस्ताक्षर होने चाहिए, जो गिरफ्तार व्यक्ति के परिवार का सदस्य या उस इलाके का कोई सम्मानित व्यक्ति हो सकता है जहां से गिरफ्तारी की गई है। इस पर गिरफ्तार व्यक्ति के भी हस्ताक्षर होने चाहिए और इसमें गिरफ्तारी का समय और तारीख दर्ज होनी चाहिए।
3) जिस व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है और उसे पुलिस स्टेशन, पूछताछ केंद्र या अन्य लॉक-अप में हिरासत में रखा गया है, उसे यह अधिकार होगा कि उसके किसी मित्र, रिश्तेदार या अन्य परिचित व्यक्ति को, जिसका उसके कल्याण में हित हो, यथाशीघ्र उसकी गिरफ्तारी और किसी विशेष स्थान पर हिरासत में रखे जाने के बारे में सूचित किया जाए, जब तक कि गिरफ्तारी ज्ञापन का गवाह स्वयं गिरफ्तार व्यक्ति का ऐसा मित्र या रिश्तेदार न हो।
4) यदि गिरफ्तार व्यक्ति का निकटतम मित्र या रिश्तेदार जिले या कस्बे से बाहर रहता है, तो गिरफ्तारी के समय, स्थान और हिरासत स्थल की सूचना पुलिस द्वारा जिले के कानूनी सहायता संगठन और संबंधित क्षेत्र के पुलिस स्टेशन को गिरफ्तारी के 8 से 12 घंटे के भीतर तारांकन के माध्यम से दी जानी चाहिए।
5) गिरफ्तार व्यक्ति को इस बात से अवगत कराया जाना चाहिए कि उसे गिरफ्तार किए जाने या हिरासत में लिए जाने के तुरंत बाद उसे अपनी गिरफ्तारी या हिरासत की सूचना किसी को देने का अधिकार है।
6) हिरासत स्थल पर केस डायरी में गिरफ्तारी के संबंध में एक प्रविष्टि की जानी चाहिए जिसमें उसके अगले मित्र का नाम भी बताया जाएगा जिसे गिरफ्तारी की सूचना दी गई है और उन पुलिस अधिकारियों के नाम और विवरण भी बताए जाएंगे जिनकी हिरासत में गिरफ्तार व्यक्ति है।
7) अनुरोध किए जाने पर, गिरफ्तारी के समय गिरफ्तार व्यक्ति की जांच भी की जानी चाहिए और उसके शरीर पर मौजूद किसी भी प्रकार की छोटी या बड़ी चोट को उसी समय दर्ज किया जाना चाहिए। “निरीक्षण ज्ञापन” पर गिरफ्तार व्यक्ति और पुलिस अधिकारी दोनों के हस्ताक्षर होने चाहिए और इसकी एक प्रति गिरफ्तार व्यक्ति को दी जानी चाहिए।
8) हिरासत में रहने के दौरान गिरफ्तार व्यक्ति की हर 48 घंटे में संबंधित राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के स्वास्थ्य सेवा निदेशक द्वारा नियुक्त अनुमोदित डॉक्टरों के पैनल में शामिल किसी प्रशिक्षित डॉक्टर द्वारा चिकित्सा जांच की जानी चाहिए। स्वास्थ्य सेवा निदेशक को सभी तहसीलों और जिलों के लिए भी ऐसा ही पैनल तैयार करना चाहिए।
9) ऊपर उल्लिखित गिरफ्तारी ज्ञापन सहित सभी दस्तावेजों की प्रतियां मजिस्ट्रेट को उनके रिकॉर्ड के लिए भेजी जानी चाहिए।
10) पूछताछ के दौरान गिरफ्तार व्यक्ति को अपने वकील से मिलने की अनुमति दी जा सकती है, हालांकि पूरी पूछताछ के दौरान नहीं।
11) सभी जिला एवं राज्य मुख्यालयों में एक पुलिस नियंत्रण कक्ष उपलब्ध कराया जाना चाहिए, जहां गिरफ्तारी के प्रभारी अधिकारी द्वारा गिरफ्तारी के 12 घंटे के भीतर गिरफ्तारी और गिरफ्तार व्यक्ति की हिरासत के स्थान के बारे में जानकारी दी जाएगी और पुलिस नियंत्रण कक्ष में इसे एक दृश्यमान सूचना बोर्ड पर प्रदर्शित किया जाएगा।
दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 41 तथा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 35 के तहत पुलिस को बिना वारंट गिरफ्तारी का अधिकार दिया गया है। इस लेख में गिरफ्तारी से जुड़े सभी महत्वपूर्ण नियम बहुत ही आसान भाषा में हम समझेएगे।
1. बिना वारंट गिरफ्तारी का अधिकार
पुलिस अधिकारी बिना मजिस्ट्रेट के आदेश और बिना वारंट के गिरफ्तारी कर सकती है।
जिन अपराधों में 7 साल तक की सजा है:उस मामले में सामान्यतः अभियुक्त को तुरंत गिरफ्तारी नहीं होती पहले नोटिस या जमानत दी जाती है अगर गिरफ्तारी होती है: तो गिरफ्तारी के कारण जी.डी. (रोजनामचा) और केस डायरी में लिखना जरूरी है। अगर गिरफ्तारी नहीं होती:उसका कारण भी लिखना जरूरी है
“7 वर्ष तक की सजा वाले मामलों में गिरफ्तारी आवश्यक परिस्थितियों में ही की जाती है”
गिरफ्तारी के लिए इन पहलुओं का ध्यान रखना आवश्यक होता है ।
1.सटीक मुखबिरी प्राप्त करे ।
2.अभियुक्त की स्थिति और हथियारों की जानकारी रखे ।
3.स्थान का भौगोलिक ज्ञान रखे ।
4.पर्याप्त पुलिस बल के साथ जाए ।
और गिरफ्तारी के बाद की प्रतिक्रिया को सही तरीके से पालन करें तो गिरफ्तारी न केवल सफल होती है, बल्कि कानून-व्यवस्था भी बनी रहती है।
Crpc धारा 41A (नोटिस देना जरूरी) 7 साल या उससे कम सजा वाले मामलों में ।
आरोपी को पहले नोटिस दिया जाएगा उसे जांच में शामिल होने के लिए बुलाया जाएगा ।
3. Crpc धारा 41(1)(A) – सामने अपराध होने पर
अगर कोई व्यक्ति पुलिस अधिकारी के सामने ही अपराध करता है, तो पुलिस उसे तुरंत गिरफ्तार कर सकती है। उदाहरण: अवैध शराब,अवैध हथियार ,नशीले पदार्थ, इसमें सजा 7 साल है या ज्यादा — यह देखना जरूरी नहीं है ।
4. CrPC धारा 41(1)(B) –
शक और साक्ष्य होने पर अगर पुलिस को लगता है कि किसी ने अपराध किया है (7 साल तक सजा वाला), तो गिरफ्तारी तभी होगी जब:
1.अपराध के पर्याप्त सबूत हों
2.गिरफ्तारी जरूरी हो ।
गिरफ्तारी कब जरूरी मानी जाएगी:
आरोपी आगे अपराध कर सकता है।
आम जनता के लोग असुरक्षित महसूस कर रहे हो।
जांच (विवेचना) के लिए जरूरी हो।
सबूत मिटाने का खतरा हो।
गवाहों को धमका सकता हो।
कोर्ट में पेशी सुनिश्चित करनी हो।
सिर्फ नाम आने से गिरफ्तारी नहीं होगी पुख्ता साक्ष्य होना जरूरी है
5. गिरफ्तारी कब सही मानी जाती है
पुलिस इन आधारों पर गिरफ्तारी कर सकती है:
आरोपी खतरनाक या क्रूर हो बार-बार अपराध करता हो।
पीड़ित को जान का खतरा हो ।
आरोपी प्रभावशाली हो (गवाहों को डरा सकता हो) आरोपी का स्थायी पता न हो अगर अपराध गंभीर है ।
07 साल से ज्यादा सजा वाले अपराध पुलिस सीधे गिरफ्तारी कर सकती है लेकिन पहले साक्ष्य होना जरूरी है ।
पुलिस इन मामलों में भी बिना वारंट गिरफ्तार कर सकती है
चोरी का सामान कब्जा में मिलने पर
पुलिस के काम में बाधा डालने पर
जेल से भागे हुए अभियुक्त को
इनाम घोषित अपराधी को
अन्य पुलिस अधिकारी की हुकुम तहरीरी पर
गिरफ्तारी के समय नियम (CrPC धारा 41B)
गिरफ्तारी करते समय पुलिस अधिकारी अपना नाम और पद बताएगा।
गिरफ्तारी मेमो /फर्द गिरफ्तारी बनायी जाएगी
यदि गवाह है तो गवाह के हस्ताक्षर होंगे
अभियुक्त के हस्ताक्षर गिरफ्तारी मेमो और फर्द पर कराया जाएगा अभियुक्त के गिरफ्तारी की सूचना परिजनों को देना जरूरी है ।
अभियुक्त को गिरफ्तारी की सूचना/गिरफ्तारी का आधार लिखित रूप में दिया जाएगा ।
गिरफ्तारी की सूचना (CrPCधारा 41C)
अभियुक्त के गिरफ्तारी की सूचना जिला कंट्रोल रूम को नोट करायी जाएगी।
गिरफ्तारी का मुख्य उद्देश्य
आरोपी को कोर्ट में पेश करना पीड़ित को न्याय दिलाना।
गिरफ्तारी कैसे की जाती है (धारा 46 CrPC) पुलिस आरोपी को पकड़ती या रोकती है यदि ऐसा व्यक्ति अपने गिरफ्तार किए जाने के प्रयास का प्रतिरोध करता है या गिरफ्तारी से बचने का प्रयत्न करता है तो ऐसा पुलिस अधिकारी गिरफ्तारी करने के लिए आवश्यक सब साधनों को उपयोग में लाएगा । अगर आरोपी खुद समर्पण करे तो बल प्रयोग नहीं किया जा सकता है ।
अगर गिरफ्तारी का विरोध करे । आवश्यक बल प्रयोग किया जा सकता है।
गिरफ्तारी के दौरान जरूरी दिशा-निर्देश
1. पुलिस की पहचान पुलिसकर्मी की पहचान साफ दिखनी चाहिए वर्दी पर नाम और पद का बैज होना जरूरी है।
पूछताछ करने वाले सभी पुलिसकर्मियों का रिकॉर्ड रखा जाएगा ।
गिरफ्तारी मेमो ,
गिरफ्तारी के समय मौके पर ही गिरफ्तारी मेमो बनाया जाएगा ।
सूचना देने का अधिकार
गिरफ्तार व्यक्ति को अधिकार है कि उसके रिश्तेदार/दोस्त को तुरंत सूचना दी जाए ।
गिरफ्तारी मेमो के अतरिक्त एक लिखित सूचना अभियुक्त/गिरफ्तार व्यक्ति को दी जाएगी और उस पर हस्ताक्षर कराया जाएगा ‌‌। कारण गिरफ्तारी सूचना में बताया जाएगा कि इस कारण गिरफ्तारी हुई है व्यक्ति को कहाँ रखा गया है।
अभियुक्त किस पुलिसकर्मी के निगरानी में है
अधिकारों की जानकारी देना आवश्यक है पुलिस का कर्तव्य है कि आरोपी को उसके अधिकार बताए रजिस्टर में एंट्री की जाएगी की अभियुक्त  के बताए गये ब्यक्ति को अभियुक्त के गिरफ्तारी की सूचना  दी जाएगी
अभियुक्त को दाखिल करते समय शारीरिक जांच करना और हुलिया लिखना चाहिए यदि कहीं चोट लगी है तो चोटों का पूरा विवरण लिखा जाएगा ।
मेडिकल परीक्षण डॉक्टर द्वारा कराया जाएगा ।
वकील से मिलने का अधिकार । पूछताछ के दौरान वकील से मिल सकता है ।
अभियुक्त के गिरफ्तारी की सूचना कंट्रोल रूम के  माध्यम से उच्चाधिकारी गण को तत्काल दी जाएगी ।
गिरफ्तार व्यक्ति को (24 घण्टे के अन्दर ) अभिलम्ब  मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया जाएगा।
अभियुक्त को गिरफ्तारी की लिखित रूप में उसके समझ मे आने वाले भाषा में दिया जाएगा
माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा Jaskaran Jeet Singh Deol बनाम State of Punjab, Criminal Appeal No. 4234/2026, निर्णय दिनांक 21.09.2026 में गिरफ्तारी एवं हिरासत से संबंधित संवैधानिक अधिकारों पर महत्वपूर्ण विधिक सिद्धांत प्रतिपादित किए गए हैं ।
मा० सर्वोच्च न्यायालय द्वारा Jaskaran Jeet Singh Deol बनाम State of Punjab, Criminal Appeal No. 4234/2026, निर्णय दिनांक 21.09.2026 में प्रतिपादित विधिक सिद्धांतों के अनुपालन में समस्त संबंधित पुलिस अधिकारियों को निर्देशित किया जाता है कि अभियुक्त को गिरफ्तारी के आधार (कारण गिरफ्तारी) लिखित रूप में अभियुक्त को उसकी समझ में आने वाली भाषा में उपलब्ध करायें, तथा अभियुक्त को शीघ्र अति शीघ्र अर्थात 24 घंटे के अंदर संबंधित न्यायालय के समक्ष पेश करें।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला: गिरफ्तारी के लिखित आधार (Grounds of Arrest) से संबंधित संपूर्ण विवरण
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करते समय गिरफ्तारी के आधार (Grounds of Arrest) लिखित रूप में देना संवैधानिक अधिकार है।
अगर पुलिस ने लिखित आधार दिए बिना गिरफ्तारी की, तो ऐसी गिरफ्तारी असंवैधानिक/अवैध हो सकती है और संबंधित पुलिस अधिकारियों के विरुद्ध विभागीय जांच (Departmental Enquiry) शुरू की जानी चाहिए।
यह अधिकार संविधान के अनुच्छेद 22(1) से जुड़ा है
गिरफ्तारी के लिखित आधार देना क्यों जरूरी है?
संविधान का Article 22(1) कहता है कि गिरफ्तार व्यक्ति को उसकी गिरफ्तारी के कारणों के बारे में बताया जाना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने इसे और स्पष्ट करते हुए कहा कि:
Grounds of Arrest लिखित में होने चाहिए।
वे ऐसी भाषा में होने चाहिए जिसे आरोपी समझता हो।
उनकी एक प्रति गिरफ्तार व्यक्ति को दी जानी चाहिए।
यह केवल पुलिस की सुविधा या सामान्य प्रक्रिया नहीं है।
यह मौलिक संवैधानिक सुरक्षा है।
अर्थात केवल इतना कहना कि “आपको इस अपराध में गिरफ्तार किया जा रहा है” पर्याप्त नहीं माना जा सकता, जब कानून के अनुसार लिखित grounds उपलब्ध कराना आवश्यक हो।
अगर लिखित Grounds नहीं दिए तो क्या होगा?
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसी स्थिति में गिरफ्तारी असंवैधानिक हो सकती है।
महत्वपूर्ण बात यह है कि अदालत ने इसे केवल एक छोटी procedural mistake नहीं माना।
फैसले के अनुसार, Article 22(1) का उल्लंघन होने पर:
गिरफ्तारी और उसके आधार पर जारी रिमांड भी प्रभावित हो सकता है।

सूचना गिरफ्तारी
नाम अभियुक्त …. पुत्र श्री…. निवासी……. थाना ……. जनपद …..
आपके विरुद्ध थाना ……जनपद- ……….पर मु.अ.सं. …………धारा ……. पंजीकृत है जिसमें आप नामित अभियुक्त हैं। साक्ष्य संकलन से अभियोग उपरोक्त में आपके विरुद्ध पर्याप्त साक्ष्य पाये गये हैं। माननीय न्यायालय/मानवाधिकार आयोग के आदेशों-निर्देशों का पालन करते हुए अन्तर्गत धारा (उपरोक्त)……. में दिनांक ……… को समय 00.00 बजे गिरफ्तार किया जाता है। गिरफ्तारी की सूचना/गिरफ्तारी का आधार आपको इस लिखित पत्र के माध्यम से दिया जा रहा है।
हस्ताक्षर:
अभियुक्त
पुलिस अधिकारी के हस्ताक्षर:
(हस्ताक्षर)
पुलिस अधिकारी नाम पद
थाना- ………
. जनपद……..
विशेष मामलों में गिरफ्तारी
किसी महिला की गिरफ्तारी किसी महिला पुलिस अधिकारी द्वारा ही किया जाएगा यह जरूरी है , रात में गिरफ्तारी से बचें। महिला अभियुक्त की गिरफ्तारी रात में गिरफ्तारी नहीं करना चाहिए । महिला अभियुक्ता के गिरफ्तारी के समय ,महिला के सम्मान और मर्यादा का ध्यान रखना आवश्यक है। तथा तलाशी महिला के सम्मान और मर्यादा का ध्यान रखते हुए महिला पुलिस अधिकारी द्वारा ही ली जाएगी यह आवश्यक है। गिरफ्तार महिला को किसी महिला अधिकारी के निगरानी में रखते हुए ,अभिलंब मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश करना चाहिए ।
बाल अपचारी के सम्बन्ध में
यदि आवश्यक हो तब बच्चे (बालक) की गिरफ्तारी सादा कपड़े में की जाएगी ।
पुलिस हथकड़ी नहीं  लगाया जाएगा।
वयस्क से अलग रखा जाएगा ।
हवालात में नहीं रखा जाएगा ।
माता-पिता को सौंपा जा सकता है ।
अभिलंब मजिस्ट्रेट/किशोर न्याय बोर्ड के सामने पेश किया जाएगा।
अभियुक्त की गिरफ्तारी प्रक्रिया
किसी भी अपराध की जांच (विवेचना) में अभियुक्त की गिरफ्तारी एक अत्यंत महत्वपूर्ण और संवेदनशील चरण होता है। गिरफ्तारी केवल एक व्यक्ति को पकड़ने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि दौरानी गिरफ्तारी मानवाधिकार आयोग एवं माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए गए आदेशों व निर्देशों का अक्षर श पालन करना है।
गिरफ्तारी सही योजना, सटीक मुखबिरी ,अभियुक्त की स्थिति, भौगोलिक ज्ञान, पर्याप्त पुलिस बल के साथ साथ दौराने गिरफ्तारी और गिरफ्तारी के बाद की प्रतिक्रिया को ध्यान में रखते हुए गिरफ्तारी  की जाती है।
अगर अभियुक्त के गिरफ्तारी करते समय किसी वस्तु को बरामद करना है तो 105 BNSS के अनुपालन में वीडियो क्लिप की आवश्यकता है।
अभियुक्त की गिरफ्तारी का उद्देश्य ,न्यायालय के समक्ष अभियुक्त को पेश करना
1. सटीक मुखबिरी ।
गिरफ्तारी की सफलता का सबसे पहला आधार होता है – सटीक और विश्वसनीय मुखबिरी।
अभियुक्त का सही लोकेशन (Location)
वह कब और कहां मौजूद रहता है
इसलिए जरूरी है कि गलत सूचना पर कार्रवाई से पूरी टीम खतरे में पड़ सकती है और सही जानकारी से गिरफ्तारी बिना जोखिम के हो सकती है।
2. अभियुक्त की सही स्थिति और अस्त्र-शस्त्र की जानकारी
गिरफ्तारी से पहले यह जानना अत्यंत आवश्यक है कि अभियुक्त की स्थिति क्या है और उसके पास कौन-कौन से हथियार हैं।
अभियुक्त के पास कौन से अस्त्र-शस्त्र (हथियार) हैं या नहीं
अभियुक्त अकेला है या गिरोह के साथ है
3. स्थान का भौगोलिक ज्ञान ।
जिस स्थान पर अभियुक्त मौजूद है, उस जगह की पूरी जानकारी ,आने-जाने के रास्ता ,आसपास की आबादी ,छिपने के संभावित स्थान,अंधेरे या संकरे रास्ते
बिना भौगोलिक जानकारी के गिरफ्तारी करना जोखिम भरा हो सकता है।
4. पर्याप्त पुलिस बल।
भीड़ या विरोध से निपटने के लिए ।
पर्याप्त मात्रा में पुलिस बल होने से गिरफ्तारी सुरक्षित और प्रभावी होती है।
गिरफ्तारी के बाद की प्रतिक्रिया
-जब मामला धार्मिक,जातीय,समुदायिक, राजनीतिक हो तब अभियुक्त की
गिरफ्तारी के बाद स्थिति अक्सर संवेदनशील हो जाती है। अभियुक्त और उसके सहयोगियों की प्रतिक्रिया को संभालना बहुत जरूरी होता है।
गिरफ्तारी के दौरान सावधानियां
माननीय सर्वोच्च न्यायालय व मानवाधिकार आयोग के आदेश वी निर्देश का अक्षर सा पालन करना आवश्यक है
दौराने गरफ्तारी तथा कसी वस्तु की बरामद की करते समय प्रत्येक दशा में 105 BNSS के अनुसार वीडियो क्लिप बनाया जाएगा (वीडियो क्लिप जियो टैग या कम से कम जीपीएस कैमरा से बनाया जाएगा गिरफ्तार किये जाने वाले अभियुक्त तथा बरामद किया जा रहा वस्तु स्पष्ट दिखाई दे रहा हो ।
महिलाओं के मामले में विशेष नियमों का पालन करें।
अभियुक्त की गिरफ्तारी और सीजर एक जटिल प्रक्रिया है इसे गंभीरता से देखें और नियमानुसार कार्यवाही करें।

गिरफ्तारी के बाद की कानूनी प्रक्रिया
अभियुक्त को गिरफ्तारी का कारण बताना,
फर्द के अतरिक्त कारण गिरफ्तारी को लिखित रूप में अभियुक्त को दे कर उसके मूल प्रति पर हस्ताक्षर कराना आवश्यक है।

गिरफ्तारी मेमो तैयार तैयार करना,
गिरफ्तारी मेमो में सभी कालम को भरना एवं अभियुक्त का हस्ताक्षर कराना ।
अभियुक्त  द्वारा बताए गए ब्यक्ति को अभियुक्त  के गिरफ्तारी की सूचना दिया जाएगा।
सूचना जिसे दिया गया है यदि वह आ गया तो गिरफ्तारी मेमो पर सूचित व्यक्ति के हस्ताक्षर कराना और लिखित सूचना परिजनों को देकर उस सूचना प्रति पर हस्ताक्षर कराना आवश्यक है।

गिरफ्तारी मेमो में बरामद वस्तु का विवरण जरूर लिखें।
अभियुक्त के गिरफ्तारी की सूचना यथा सम्भव तत्काल या कम से कम मान0 न्यायालय में पेश करने के 02 घंटे पहले उसके परिवार वालों को देना आवश्यक है । जिसका तस्करा जी डी मे अंकित करना होगा ।
यदि ऐसा नहीं हुआ तो गिरफ्तारी अवैध माना जाता है
अभियुक्त का मेडिकल परीक्षण कराना, 24 घंटे के अंदर न्यायालय में पेश करना ।
अभियुक्त की गिरफ्तारी और किसी वस्तु की बरामदगी एक जटिल और जिम्मेदारी भरी प्रक्रिया है,
गिरफ्तारी के ये नियम इसलिए बनाए गए हैं जिससे किसी के अधिकारों का गलत इस्तेमाल न हो पुलिस सही प्रक्रिया अपनाए जनता का विश्वास बना रहे गिरफ्तारी एक संवेदनशील प्रक्रिया है, इसलिए: आरोपी के अधिकार सुरक्षित रहना जरूरी है पीड़ित को न्याय मिलना चाहिए कानून का सही पालन होना चाहिए।


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