उ0प्र0 पुलिस मे आरक्षी का कार्य

उ0प्र0 पुलिस मे आरक्षी का कार्य
इस पेज पर जो भी लिखा गया है वह आसान शब्दों में और आसानी से समझने के लिए ही लिखा गया है इसे लखने का इतना ही उद्देश्य है की सरलता से समझा जा सके
उ0प्र0 पुलिस में आरक्षी पुलिस विभाग की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी होता है। उसका मुख्य कार्य कानून व्यवस्था बनाए रखना, अपराध रोकना तथा जनता की सुरक्षा करना है।”
आरक्षी का मूलतः निम्न कार्य होता है

पैरा-61. आरक्षी ना0पु0 का कर्तव्य अपराध रोकना है सुराग रसी पतारसी के अलावा कर्तव्य पालन पर हमेशा वर्दी पहनेगा

1.सन्तरी के कार्य एवं कर्तव्य
पैरा-62. थाने पर दिन व रात्रि मे एक सन्तरी रहेगा । हवालात मे एक बन्दी होने या 500 से अधिक धन होने पर पहरा परिवर्तन HC व SI करायेगा

भारसाधक अधिकारी बारी-बारी से सन्तरी का कर्तव्य आवंटित करेगा। सन्तरी का कर्तव्य (ड्यूटी) दिन में दो बार प्रातः और सन्ध्या को, वितरण की जावेगी। सन्तरी के कर्तव्यों की अवधि तीन घण्टे होगी। दिन के समय में और रात में भी सन्तरियों को उपनिरीक्षक या प्रधान कान्स्टेबिल द्वारा पद पर लगाना और मुक्त करना चाहिये जब तक कि हवालात में कोई बन्दी और किसी मामले की महत्वपूर्ण सम्पत्ति न हो और मालखाने में 500 रु० से कम का धन हो। चाहे सन्तरियों को ज्येष्ठ अधिकारी द्वारा पदस्थ और मुक्त किया जावे या नहीं,

पैरा -158. हवालात मे निर्धारित संख्या से अधिक बन्दी नही रखे जएगे । हवालात मे प्रतेक बन्दी के लिए 36 वर्ग फिट 24 घनफिट जगह होगी ।

पैरा-161. पागल कैदी को अन्य कैदियो के साथ हवालात मे नही रखा जाएगा इसके लिए थानाध्यक्ष उत्तरदायी होगे।

गिरफ्तार व्यक्ति के बारे में जानकारी

गिरफ्तार व्यक्ति को 24 घंटे से अधिक निरुद्ध नहीं रखा जाएगा धारा 57 CrPC

पैरा -154. गिरफ्तार व्यक्ति की जामा तलाशी । धारा 51 CrPC

पैरा -155. गिरफ्तार किये गये व्यक्ति के दोस्तो ,और कानूनी सलाह देने वाले व्यक्तियो से मिलने की अनुमति देनी चाहिए ।

परिजन/मित्र को सूचना देने का कानूनी आधार → धारा 50A CrPC / धारा 48 BNSS

पैरा- 156. गिरफ्तार व्यक्ति की जमानत । धारा 436,437 CrPC

पैरा- 157.गिरफ्तार व्यक्ति की सुरक्षा और खानपान के लिए थानाध्यक्ष उत्तरदायी है

पैरा -159. स्वस्थ तथा अस्वस्थ कैदियो के लिए भोजन एंव यातायात की व्यावस्था ।

पैरा 160. बन्दियो को न्यायालय मे पेश करने हेतु (मजिस्ट्रेट के समक्ष) निर्देश

पैरा -162.भटकी हुई अवयस्क लडकियो को पुलिस अभिरक्षा मे नही रखा जएगा ।

पैरा -163. गम्भीर रूप से बीमार व्यक्ति को गिरफ्तार करने पर और यदि उसे अभिरक्षा मे रखना आवश्यक हो तो उसकी समुचित व्यावस्था गिरफ्तार करने वाला करेगा

पैरा -164. जेल से छोडे गये किसी दोष सिद्ध किशोर का उसके घर तक मार्ग रक्षा पुलिस द्वारा नही की जएगी

मालखाना के सम्बन्ध में कुछ सामान्य जानकारी
पैरा-165. (1) पुलिस एक्ट की धारा 25 व CrPC की धारा 83,84,85,422,457 के तहत कुर्क या कब्जे मे ली गयी सम्पत्ति की सूची जी0डी0 मे बनाई जाएगी ।

(2) कुर्क या कब्जे मे ली गयी सम्पत्ति पशुधन के अतरिक्त बडी सम्पत्ति की सूची बनाकर मजिस्ट्रेट के आदेश आने तक किसी सम्मानित व्यक्ति की सुपुर्दगी मे दी जा सकेगी ।

(3)थानाध्यक्ष पशुओ को कांजी हाउस मे देने के बजाय चरवाहा नियुक्त कर सकता है।

(7) मालखाना लेखक की सेवा 15 वर्ष पूर्ण होने पर नियुक्त करना चाहिए

पैरा -166 . 100 रूपये से अधिक नकदी के शिवाय और सामान्य मूल्य की सम्पत्ति SPO के अधीन मालखाना मोर्हर्रिर के कब्जे मे रहेगी ।

पैरा -167. मालखाना मोहर्रिर दिन मे आपेक्षित सम्पत्ति न्यायालय मे संलग्न पुलिस को सौपेगा और उसे वापस प्राप्त करेगा

पैरा -168. SPO सम्पत्ति के निपटारे मे सम्बन्धित न्यायालय के आदेश का पालन करेगा

पैरा -168क. पुलिस द्वारा बरामद अग्नेयास्त्र को न्यायालय के निर्णय के बाद नष्ट करने हेतु समित मे जिलाधिकारी द्वारा नामित मजिस्ट्रेट तथा एक सम्मानित व्यक्ति तथा SPO द्वारा नामित एक पुलिस अधिकारी होगा

पैरा -169. 06 माह से अधिक समय से मालखाने मे रखी वेदावी सम्पत्ति के निपटारे हेतु SPO मजिस्ट्रेट के संज्ञान मे लाएगा ।

पैरा -170. मालखाने का SPO द्वारा मासिक तथा राजपत्रित अधिकारी द्वारा त्रिमासिक निरीक्षण किया जाएगा

पैरा-171. किसी मजिस्ट्रेट के न्यायालय से संलग्न पुलिस अधिकारी जो जिला मुख्यालय से अनेत्र हो गोला बारूद एंव अग्नेयास्त्र के रजिस्टर को बनाये रखेगा और उसे CO अथवा राजपत्रित अधिकारी द्वारा चेक किया जएगा

पैरा -172. मृत व्यक्ति की सम्पत्ति SPO के अधीन रहेगी

पैरा-173. थानाध्यक्ष थाने पर जमा कराये गये शस्त्रो को सुरक्षित रखने हेतु उत्तरदायी होगे और 15 दिन के अन्दर वापसी का आदेश न मिलने पर उसे जिला मुख्यालय हेतु अग्रसारित करेगे

-रजि0 मालमुकदमाती थाने पर रखने की अवधि- स्थाई है

पैरा-174.माल लादावा का निस्तारण सम्बन्धित न्यायालय के आदेश से होता है

-डकैती या गिरोह द्वारा लूट की घटना होने पर SP व SO की कार्यवाही

पैरा-63. वीट का0 का उल्लेख 

थाने के (वृत्त) फेरे जगहों में विभाजित किये जावेंगे, और हर फेरे की जगह के लिये एक या अधिक कान्स्टेबिल नियुक्त किये जावेंगे। कोई कान्स्टेबिल बाहर नहीं जावेगा जब तक कि वह किसी विशेष कर्तव्य से प्रभारित न हो, किन्तु जब भेजा जावे तो उसे यह अनुदेश दिया जावे कि वह निगरानी के अधीन व्यक्तियों फरार अपराधियों, घूमने वाली जन-जातियों और हो रही घटनाओं के बारे में रास्ते में पूछताछ करे, थाने में लौटने पर उसे भारसाधक अधिकारी को रिपोर्ट देना चाहिये।

साधारणतया किसी कान्स्टेबिल को थाने या चौकी से लगातार तीन दिन और दो रातों से अधिक के लिये बाहर नहीं रहना चाहिये, उस अधिकारी को पहले से न देखी जा सकने वाली घटनाओं के कारण की जाने वाली विस्तार के अपवाद के अध्याधीन रहते हुये, जो उसे बाहर भेजे, उसकी अनुपस्थिति का समय नियुक्त करना चाहिये।

गस्त- सभी थाने को बीट व माइक्रो बीट मे बांटा गया है आरक्षी अपने बीट /क्षेत्र मे नियमित गस्त करता है जिससे अपराध को रोका जा सके तथा रात्रि के समय रात्रि गस्त तथा रात्रि गस्त के पूरक विकल्प की डियूटी करके क्षेत्र की सुरक्षा एंव निगरानी करता है 

पैरा-64. का0 डियूटी के शिवाय बिना प्लेट फार्म टिकट के रेलवे प्लेटफार्म पर नही जाएगा

-जिला पुलिस के कान्स्टेबिल जब कर्तव्य पर हों, रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म पर प्रकट होने और बने रहने के अधिकारी होंगे। स्टेशन मास्टर को जिला पुलिस के उप कान्स्टेबिल के हटने के लिये आदेश देने का कोई अधिकार नहीं है जो उसके रेलवे स्टेशन पर कर्तव्यस्थ हो। जिला पुलिस का सादा वस्त्रों वाला हर वह कान्स्टेबिल जो रेलवे स्टेशन पर कर्तव्य पर भेजा जावे, अपने साथ उसको प्रतिनियुक्त करने वाले उपनिरीक्षक का सामान्य लिखित आदेश ले जायेगा और उसे स्टेशन मास्टर को, यदि अपेक्षा की जावे, प्रस्तुत करेगा।

2. टेलीफोन एवं वायरलेस ड्यूटी
पुलिस विभाग में सूचना का त्वरित आदान-प्रदान, घटनाओं की जानकारी मुकदमा पंजीकृत करने की सूचना,अभियुक्त के गिरफ्तारी की सूचना, तथा अधिकारियों तक संदेश पहुँचाने का कार्य मुख्य रूप से वायरलेस और टेलीफोन व्यवस्था से किया जाता है।

उदाहरण

आरटी सेट संदेश बनाना
NR… GR

सेवा में,

श्रीमान DM/SP/Addl SP(S)/CO(HQ)/All SHO/SO महोदय

जनपद ..,…

प्रेषक: प्रभारी निरीक्षक …….जनपद ……… दिनांक 00/00/0000

आज दिनांक 00/00/0000 को श्री …..पुत्र श्री ……निवासी ग्राम ……… थाना ….,..जनपद ….,… उपस्थित थाना आकर एक किता तहरीर बावत खुद के पुत्र पिता/ बहन /पुत्री /पत्नी /…..निवासी उपरोक्त के दिनांक 0.0.2026 को समय करीब 00.00 बजे बिना कुछ बताये घर से चले जाने के संबंध में दाखिल किया।

जिसकी हुलिया – दोहरा मजबूत जिस्म, रंग गेहुआ, आँख-नाक-कान औसत, लम्बाई करीब ….फिट, उम्र करीब …. वर्ष, पहनावा क्रीम कलर का लोअर, सफेद रंग की टी-शर्ट व पैर में सैंडल /जूता पहने हैं। दाखिल तहरीर के आधार पर थाना हाजा पर रपट नं. 00 समय 00:00 बजे दिनांक 00/00/0000 पर गुमशुदगी दर्ज है। उपरोक्त के संबंध में यदि किसी थाने को सूचना मिलती है तो थाना स्थानीय को सूचित करने का कष्ट करें ।सूचनार्थ प्रेषित है।

सूचनाार्थ प्रेषित है।

3. आगन्तुकों/महिलाओं/बच्चों के साथ शिष्ट व शालीन व्यवहार
पुलिस विभाग में आगन्तुकों, महिलाओं एवं बच्चों के साथ शिष्ट एवं शालीन व्यवहार करना प्रत्येक पुलिस कर्मी का महत्वपूर्ण कर्तव्य है।

महिलाओं और बच्चों की समस्याओं को संवेदनशीलता एवं धैर्यपूर्वक सुनना चाहिए।

थाने अथवा पुलिस कार्यालय में आने वाले प्रत्येक व्यक्ति से सम्मानपूर्वक व्यवहार करना पुलिस की छवि को बेहतर बनाता है।

विनम्र व्यवहार से जनता का पुलिस प्रशासन पर विश्वास मजबूत होता है।

JJ Act धारा 3
बालकों की देखरेख और संरक्षण के साधारण सिद्धांत
3. अधिनियम के प्रशासन में अनुसरित किए जाने वाले साधारण सिद्धांत— यथास्थिति, केन्द्रीय सरकारें, [बोर्ड, समिति या] अन्य अभिकरण इस अधिनियम के उपबंधों को क्रियान्वित करते समय निम्नलिखित मूलभूत सिद्धांतों द्वारा मार्गदर्शित होंगे, अर्थात्:-

(i) निर्दोषिता की उपधारणा का सिद्धांत: किसी बालक के बारे में, अठारह वर्ष की आयु तक यह उपधारणा की जाएगी कि वह किसी असद् भावपूर्ण या आपराधिक आशय के दोषी नहीं है।

(ii) गरिमा और योग्यता का सिद्धांत: सभी मनुष्यों के साथ समान गरिमा और अधिकारों के साथ बर्ताव किया जाना चाहिए।

(iii) भाग लेने का सिद्धांत: प्रत्येक बालक को सुने जाने का और उसके हितों को प्रभावित करने वाली सभी आदेशिकाओं और विनिश्चयों में भाग लेने का अधिकार प्राप्त है और बालक के दृष्टिकोण पर बालक की आयु और परिपक्वता को सम्यक् ध्यान में रखते हुए विचार किया जाएगा।

(iv) सर्वोत्तम हित का सिद्धांत: बालक के संबंध में सभी विनिश्चय मुख्यतया इस विचारणा पर आधारित होंगे कि वे बालक के सर्वोत्तम हित में हैं और बालक के लिए अपनी पूर्ण क्षमता को विकसित करने में सहायक हैं।

(v) कौटुंबिक जिम्मेदारी का सिद्धांत: बालक की देखरेख, उसका पोषण और उसको संरक्षण करने की प्राथमिक जिम्मेदारी जैविक कुटुंब या, यथास्थिति, दत्तक अथवा पालक माता-पिता की है।

(vi) सुरक्षा का सिद्धांत: यह सुनिश्चित करने के लिए कि बालक सुरक्षित है और देखरेख तथा संरक्षण-पद्धति के संपर्क में रहते हुए और उसके पश्चात् उसकी कोई अपहानि, उससे दुर्व्यवहार या बुरा बर्ताव नहीं किया जाता है, सभी उपाय किए जाने चाहिए।

(vii) सकारात्मक उपाय: सभी स्रोतों को, इसके अंतर्गत वे भी हैं जो कुटुंब और समुदाय के हैं, कल्याण की प्रोन्नति, पहचान के विकास को सुकर बनाने और बालकों की असुरक्षा को कम करने के लिए समावेशित और समर्थकारी वातावरण उपलब्ध कराने और इस अधिनियम के अधीन मध्यक्षेप की आवश्यकता के लिए गतिमान किया जाना चाहिए।

(viii) गैर-कलंककीय शब्दावलियों का सिद्धांत: किसी बालक से तात्पर्यित आदेशिकाओं में प्रतिकूल या अभियोगात्मक शब्दों का प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए।

(ix) अधिकारों का अधित्यजन न किए जाने का सिद्धांत: बालक के किसी अधिकार का किसी भी प्रकार का अधित्यजन अनुज्ञेय या विधिमान्य नहीं है चाहे उसकी ईप्सा बालक द्वारा की गई हो या बालक की ओर से कार्य करने वाले व्यक्ति या किसी बोर्ड या समिति द्वारा की गई हो और किसी मूल अधिकार का प्रयोग न किया जाना अधित्यजन की कोटि में नहीं आएगा।

(x) समानता और विभेद न किए जाने का सिद्धांत: किसी बालक के विरुद्ध किसी भी आधार पर, जिसके अंतर्गत लिंग, जाति, नस्ल, जन्म-स्थान, नि:शक्तता भी है, किसी प्रकार का विभेद नहीं किया जाएगा और पहुंच, अवसर और बर्ताव में समानता प्रत्येक बालक को दी जाएगी।

(xi) एकांतता और गोपनीयता के अधिकार का सिद्धांत: प्रत्येक बालक को सभी साधनों द्वारा और संपूर्ण न्यायिक प्रक्रिया में अपनी एकांतता और गोपनीयता की संरक्षा करने का अधिकार प्राप्त होगा।

(xii) अंतिम अवलंब के उपाय के रूप में संस्थात्मकता का सिद्धांत: बालक को युक्तियुक्त जांच करने के पश्चात् अंतिम अवलंब के उपाय के रूप में संस्थागत देखरेख में रखा जाएगा।

(xiii) संप्रत्यावर्तन और प्रत्यावर्तन का सिद्धांत: किशोर न्यायिक पद्धति में प्रत्येक बालक को शीघ्रातिशीघ्र अपने कुटुंब से पुन: मिलाने का और उसी सामाजिक-आर्थिक और सांस्कृतिक प्रास्थिति में, जिसमें वह इस अधिनियम के क्षेत्राधीन आने के पूर्व रहता था, प्रत्यावर्तित होने का, जब तक कि ऐसा प्रत्यावर्तन और संप्रत्यावर्तन उसके सर्वोत्तम हित में हो, अधिकार प्राप्त होगा।

(xiv) नए सिरे से शुरुआत करने का सिद्धांत: किशोर न्याय पद्धति के अधीन किसी बालक के पिछले सभी अभिलेखों को, विशेष परिस्थितियों के सिवाय, समाप्त कर दिया जाना चाहिए।

(xv) अपयोजन का सिद्धांत: विधि का उल्लंघन करने वाले बालकों से न्यायिक कार्यवाहियों का अपयोजन लिए बिना, जब तक कि वह बालक या संपूर्ण समाज के सर्वोत्तम हित में न हो, निपटने के उपायों को बढ़ावा दिया जाएगा।

(xvi) नैसर्गिक न्याय के सिद्धांत: इस अधिनियम के अधीन न्यायिक हैसियत में कार्य करते हुए सभी व्यक्तियों या निकायों द्वारा ऋजुता के बुनियादी प्रक्रियात्मक मानकों का, जिनके अंतर्गत निष्पक्ष सुनवाई का अधि

4. कानून एव व्यावस्था बनाये रखना
प्रदर्शन व झगडे दंगा  या विवाद आदि के समय मे त्वारितघटना स्थल पर पहुच कर विधिनुसार आवश्यक कार्यवाही कर शान्ति बनाते हुए अपने उच्चाधिकारीगण को सूचना देता है 

5. प्रथम सूचना रिपोर्ट व प्राप्त प्रार्थना पत्र से सम्बन्धित कार्य
थाने पर आने वाले मामले की सूचना दर्ज करना – जब कोई पीडित व्यक्ति थाना पर आकर किसी अपराध होने की सूचना लिखित या मौखिक रूप से देता है तो तत्काल उच्चाधिकारी को सूचित कर प्रथम सूचना रिपोर्ट लिखकर पीडिता का यदि आवश्यक है तो थाना स्थानीय से किसी कर्मचारी के साथ अस्पताल भेज कर मेडिकल कराता है तथा पीडित को प्रथम सूचना रिपोर्ट की एक प्रति देकर यथा सम्भव मदद करके थाना हाजा से रूकसत करता है तथा बाट आरक्षी घटना स्थल से सम्बन्धित  प्रारम्भिक जानकारी वरिष्ट अधिकारी को देता है 



6. वरिष्ठ अधिकारियो की सहायता करना
किसी अपराध के होने की परिकल्पना पर बीट सूचना अंकित कराता है तथ किसी अपराध के होने की स्थिति मे विवेचना अधिकारी व जांच कर्ता अधिकारी की जांच/ विवेचना मे मदद करना अपराधियो को पकडना पूछताछ व मान0 न्या0 के समक्ष पेश करना व मान0 न्या0 द्वारा निर्गत आदेशिका का अनुपालन करना जैस सम्मन नोटिस जमानतीय वारन्ट की तामीला करना

7. थाना से सम्बन्धित  प्रशासनिक कार्य
प्रतेक थाना पर थाना कार्यालय मे का0 कलर्क होता है जो थाना स्थानीय पर आने वाले पीडित के प्रार्थना पत्र के आधार पर प्रारमिकी दर्ज करता है प्र्थम सूचना रिपोर्ट की एक प्रति वादी मुकदमा/ पीडित को निःशुल्क प्रदान करता है व थाना पर मौजूद संम्बन्धित रजिस्टर मे उस प्राथमिकी की आवश्यक बात को  अंकित करता है

8.आपात स्थिति मे डियूटी
आपात स्थिति मे दुर्घटना ,आग लगने, चोरी होने व किसी प्रकार का अपराध होने पर त्वरित घटना स्थल पर पहुचना तथा प्राप्त जानकारी को अपने वरिष्ट अधिकारी को देना तथापीडित व्यक्ति की सुरक्षा व मदद करना

7.विशेष डियूटी ( वीआईपी डियूटी त्योहार चुनाव आदि )
वीआईपी डियूटी त्योहार चुनाव आदि के समय सुरक्षा करना धार्मिक उत्सव मे भीड नियन्त्रण करना

आरक्षी के अधिकार
अपराधी को पकडने का अधिकार (कानूनी प्राविधानो के तहत)

गिरफ्तार व्यक्ति की जामातलाशी लेना फर्द तैयार करना

फर्द जामा तलाशी वांछित अभियुक्त

CrPC की धारा 51 के अनुसार, व BNSS की धारा 2023 की धारा 49 के अनुसार

आज दि. 00.00.20…को समक्ष गवाहान सर्वश्री 1……………………..पुत्र………………………. निवासी ग्राम……………………. थाना……………………….जिला……………………….तथा 2.श्री……………………….पुत्र………………………. निवासी ग्राम…………………….. थाना……………………….जिला……………………… गिरफ्तारशुदाअभियुक्त……………………..पुत्र ………………. निवासी ग्राम…………..थाना……………………….जिला……………………….सम्बन्धित मु0अ0स0……………………… धारा………………………. थाना………………………. जिला………………………. को गिरफ्तारी का आधार बताकर जामा तलाशी ली गयी तो (अलावा पहने कपड़ों के अन्य कोई शय बरामद नहीं हुआ)

यदि कोई वस्तु बरामद होती है तो उसे लिखा जाएगा और बरामद वस्तु का हुलिया भी लिखा जाएगा।

फर्द जामा तलाशी लिखकर, पढ़कर, सुनाकर सर्व सम्बन्धित के अलामात बनवाए जा रहे है

1. नाम पता गवाह हस्ताक्षर   

2. नाम पता गवाह हस्ताक्षर

3.हस्ताक्षर अभियुक्त। नाम पद

                                                           पुलिस अधिकारी

                                                              दिनांक

नोट— फर्द की एक प्रति अभियुक्त की दी गयी

हस्ताक्षरअभियुक्त 

                                                            हस्ताक्षर

                                                       पुलिस अधिकारी

अपराध की सूचना वरिष्ठ अधिकारी तक पहुँचाना

सार्वजनिक स्थानो की सुरक्षा व जांच

आरक्षी के डियूटी का प्रकार
1.थाना डियूटी -रिपोर्ट लिखना थाना हवालात व थाने की निगरानी व सुरक्षा

2.बीट ड्यूटी –गस्त व क्षेत्र की निगरानी व सुरक्षा व क्षेत्र के लोगो से सम्पर्क रखना

3.मोबाईल डियूटी – अपराध स्थल (घटना स्थल ) व आपात स्थिति मे तत्काल पहुचना

4.वीआईपी/ इवेन्ट डियूटी – विशेष अवसर व इवेन्ट प्राप्त होने पर तत्काल पहुचकर विधिनुसार आवश्यक कार्यवाही करना

पुलिस विभाग के आरक्षी का मूल कार्य कानून व्यावस्था बनाये रखना ,अपराध रोकना व जनता की सुरक्षा करना है

नोट-इस ब्लॉग पर प्रकाशित सभी जानकारी केवल सामान्य शैक्षिक एवं सूचना के उद्देश्य से प्रदान की गई है। यह किसी भी प्रकार की कानूनी सलाह (Legal Advice) नहीं है। किसी भी विशेष मामले में कृपया योग्य अधिवक्ता या विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें। इस ब्लॉग पर दी गई जानकारी के उपयोग से होने वाले किसी भी लाभ या हानि के लिए लेखक/ब्लॉग उत्तरदायी नहीं होगा।”

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