सन्धि क्या है? (परिभाषा)
इस पेज पर जो भी लिखा गया है वह आसान शब्दों में और आसानी से समझने के लिए ही लिखा गया है इसे लखने का इतना ही उद्देश्य है की सरलता से समझा जा सके
दो वर्णों या ध्वनियों के मेल से जो परिवर्तन होता है, उसे सन्धि कहते हैं।
सन्धि हिंदी व्याकरण का महत्वपूर्ण विषय है, जिसमें दो वर्णों के मेल से नए शब्द बनते हैं।”
सन्धि करते समय कभी एक वर्ण में, कभी दोनों वर्णों में परिवर्तन होता है, और कभी दोनों के स्थान पर नया वर्ण बन जाता है।
उदाहरण:
सुर + इन्द्र = सुरेन्द्र
विद्या + आलय = विद्यालय
सत् + आनन्द = सदानन्द
सन्धि के प्रकार
सन्धि मुख्यतः तीन प्रकार की होती है:
🔹 स्वर सन्धि
🔹 व्यंजन सन्धि
🔹 विसर्ग सन्धि
स्वर सन्धि
जब एक स्वर के साथ दूसरा स्वर मिलकर परिवर्तन करता है, उसे स्वर सन्धि कहते हैं।
इसके 5 भेद होते हैं:
1. दीर्घ सन्धि
सूत्र: अकः सवर्णे दीर्घः
जब समान स्वर मिलते हैं, तो वे मिलकर दीर्घ हो जाते हैं:
अ + अ = आ → पुष्प + अवली = पुष्पावली
इ + इ = ई → कवि + इन्द्र = कवीन्द्र
उ + उ = ऊ → सु + उक्ति = सूक्ति
2. गुण सन्धि
सूत्र: आद्गुणः
अ/आ + इ/ई = ए → उप + इन्द्र = उपेन्द्र
अ/आ + उ/ऊ = ओ → चन्द्र + उदय = चन्द्रोदय
अ/आ + ऋ = अर् → देव + ऋषि = देवर्षि
3. वृद्धि सन्धि
सूत्र: वृद्धिरेचि
अ/आ + ए/ऐ = ऐ → पुत्र + एषणा = पुत्रैषणा
आ + ऐ = ऐ → महा + ऐश्वर्य = महैश्वर्य
अ/आ + ओ/औ = औ → जल + ओकस = जलौकस
4. यण सन्धि
सूत्र: इको यणचि
इ/ई → य → अति + अल्प = अत्यल्प
उ/ऊ → व → सु + आगत = स्वागत
ऋ → र → पितृ + आज्ञा = पित्राज्ञा
5. अयादि सन्धि
ए → अय → ने + अन = नयन
ऐ → आय → नै + अक = नायक
ओ → अव → पो + अन = पवन
औ → आव → पौ + अक = पावक
(II) व्यंजन सन्धि
जब व्यंजन के साथ व्यंजन या स्वर का मेल होता है, तो जो परिवर्तन होता है उसे व्यंजन सन्धि कहते हैं।
नियम:1.
क्, च्, ट्, त्, प् के बाद यदि स्वर या वर्ग का 3rd/4th वर्ण आए → वह अपने वर्ग के तीसरे वर्ण में बदल जाता है:
दिक् + अम्बर = दिगम्बर
नियम 2.
अनुनासिक वर्ण (ङ, ञ, ण, न, म) के प्रभाव से परिवर्तन:
वाक् + मय = वाङ्मय
(III) विसर्ग सन्धि
विसर्ग (ः) के साथ स्वर या व्यंजन के मेल से जो परिवर्तन होता है, उसे विसर्ग सन्धि कहते हैं।
उदाहरण:
निः + चल = निश्चल
दुः + शासन = दुश्शासन
निष्कर्ष
सन्धि हिंदी व्याकरण का एक महत्वपूर्ण भाग है, जिसमें वर्णों के मेल से नए शब्द बनते हैं। इसके तीन मुख्य प्रकार—स्वर, व्यंजन और विसर्ग सन्धि—भाषा को अधिक प्रभावशाली और सुंदर बनाते हैं।
नोट-इस ब्लॉग पर प्रकाशित सभी जानकारी केवल सामान्य शैक्षिक एवं सूचना के उद्देश्य से प्रदान की गई है। यह किसी भी प्रकार की कानूनी सलाह (Legal Advice) नहीं है। किसी भी विशेष मामले में कृपया योग्य अधिवक्ता या विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें। इस ब्लॉग पर दी गई जानकारी के उपयोग से होने वाले किसी भी लाभ या हानि के लिए लेखक/ब्लॉग उत्तरदायी नहीं होगा।”
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